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जड़ तंत्र ?(लघु कथा)

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बड़े-बड़े पोस्टरों के साथ कानों को सुन्न करने वाले शोर के बीच में अपनी आशाओं को बल देने वाले विचारों और घोषनाओं के समक्ष जब भी पाता हूँ तब मेरे जैसा एक निरीह व अदना सा आदमी भी अपनी तृष्णा को धार देने में लग जाता है ! लगता है अब तो कुछ बदलेगा ही इस चुनाव में तो हम सही और सच्चे आदमी को ही वोट देंगे जो हमारे देश और समाज के लिए कुछ करेगा !

सुबह का अखबार देखते हुए चाय के साथ गर्मी कि चाहत में धूप में अपनी कुर्सी खिसकाते हुए शर्मा जी ने पत्नी से कुछ सारगर्भित सलाह लेने का मन बनाया !

सुनती हो ? …………कोई काम न हो तो चाय साथ पीते हैं !

इस घर में और कोई काम न हो ऐसा हो सकता है ? …………आवाज में ज्यादा तल्खी तो नहीं थी लेकिन मूड ठीक भी नहीं था !

लेकिन विचारों और उलझन से भरे शर्मा जी को जैसे विमर्श कि सख्त आवश्यकता थी ” अच्छा कोई बात नहीं मेरा मोबाइल ही ला कर दे दो ” ………..शर्मा जी ने दूसरा आग्रह किया !

मिसेज शर्मा ने ज्यादा विवाद में न पड़ने का फैसला लिया और मोबाइल शर्मा जी को पहुचाते हुए बोलीं …….. बैलेंस ख़तम होने को है आज रिचार्ज भी करवा लेना !

क्या ? ………शर्मा जी थोडा परेशान से होते हुए …..”अभी शनिवार को तो 330 रूपए का रिचार्ज कराया था ? क्या हुआ ?
मिसेज शर्मा कि त्योरियां अब चढ़ चुकी थीं …………”कल घर में कोई सब्जी नहीं थी तो सबको बेलेंस ही तो खिलाया था ………….”अब ज्यादा सिर न खाओ ………… शर्मा जी थोडा बेकफुट में आते हुए ” चलो कोई बात नहीं मैं चला ही जाता हूँ और कोई काम तो नहीं है ?………..”नहीं …….मिसेज शर्मा ने टालते हुए कहा !

” चीटियों के भी पर निकलते हैं ” एक कहावत जो चरितार्थ होती सी लगती है….. शर्माजी ” को आज कोई भी जैसे रोक पाने मैं असमर्थ ही होगा लगता तो ऐसा ही था ! चेहरे पर देश से ले कर घर तक की समस्याएं व चिंताएं साफ़-साफ़ देखी व रेखांकित की जा सकती थीं ! वोटिंग को ज्यादा समय नहीं बचा था और शर्मा जी अभी तक अपने देश और समाज के नए भावी सारथी का चयन भी नहीं कर पाए थे !

शर्मा जी के कदम एक छोटी पान के जैसी आधुनिक गुमटी के पास ले गए ….. जो आज कल सभी छोटे-छोटे शहरों और मुहल्लों के विकास का जीता जागता उदाहरण होतीं हैं और शायद ही कोई छोटी या बड़ी समस्या का हल यहाँ न मिले ऐसा आज तक महसूस नहीं हुआ ! घर की आवश्यकताओं से ले कर मन की भी सभी समस्याओं का हल भी इन्हीं गुमटियों से मिलने की ज्यादा संभावनाएँ रहती हैं !

शर्मा जी के चेहरे की चमक दोगनी हो चुकी थी जैसे ही उन्हें सामने से उपाध्याय जी आते हुए दिखे …………शर्मा जी ”नमस्कार” ……….उपाध्याय जी की धमक दार आवाज जो किसी पुराने नेता से कम नहीं थी जो बड़े-बड़े मंचों से दहाड़ते हुए पकाई जाती है ……नमस्ते ”उपाध्याय जी” नमस्ते …… शर्माजी जी को लगा जैसे आज तो जो माँगा वही भगवान दे देगा ……मन का सारा अंतर्द्वन्द बस छलकने को चाह ही रहा था तभी देश के एक भावी कर्णधार इस बार के चुनाव में किस्मत अजमाते हुए अपनी भाव हीन मुस्कान के साथ हमारे सामने एक समस्या की भांति प्रगट हुए ……हाथ चरणों की तरफ बढ़ाते हुए ……प्रणाम के जैसा कुछ कहते हुए ……जैसे किसी गलती की माफ़ी मांग रहे हों …….”इस बार आपकी कृपा हो जाए तो आपकी सेवा का अवसर मिले”………”नेता जी ने आग्रह किया” …. शर्मा जी के कुछ समझने से पहले ही उपाध्याय जी ने मोर्चा संभाला और सवाल भी दाग दिया…….. आप को तो घर पर बुलाया था आप आये नहीं ? ……क्षमा चाहता हूँ उपाध्याय जी समयाभाव में उपस्थित नहीं हो पाया …….कल जरूर दर्शन को आऊंगा ! नेता जी बात चबाते हुए आगे अपने अगले शिकार की ओर बढ गए !
”भाईसाहब” बड़े दिनों बाद मिलना हुआ क्या हाल चाल हैं ?……..शर्मा जी ने बात आगे बड़ाई …….बस कुछ नहीं एक सम्मलेन में गया था बड़ी दूर-दूर से अपने समाज के पहुचे हुए वक्ताओं को सुनने का अवसर मिला बहुत कुछ सीखने को मिला …….हमें तो पता ही नहीं था की कैसे हमें सामाजिक रूप से गिराने की और कुचलने की तैयारी कर रखी है सरकार ने हमारी जाति को नीचा दिखाने लिए क्या-क्या षड़यंत्र चल रहे शर्मा जी …..कैसे बताऊं?……. सोच कर ही मन थर्रा जाता है !

ऐसा भी क्या………. ? शर्मा जी ने आश्चर्य भरे भाव के साथ रक्त संचार बड़ने के संकेत भी दिए ……..उपाध्याय जी रुकने के मूड में नहीं थे ……………बस कुछ समझने और समझाने से अच्छा है अपने पूर्वजों द्वारा की गयीं कुर्बानियों को याद किया जाए और अपनी जात के लिए कुछ किया जाए …….वरना अगले समय में हमारे पूर्वजों द्वारा हम कभी मांफ नहीं किये जायेंगे………हमारी जाति का अब अंत आ गया समझो……..उपाध्याय जी के कथन मानो शर्मा जी के ह्रदय के हजार टुकड़े करने में सक्षम था …….शर्मा जी के अन्दर जैसे ग्लानि होने लगी थी अपने आप से ……….क्या हो गया था मुझे ? ……….मुझे देश और समाज की बात सोचने का हक़ ही कहाँ है जब तक हमारी जाति ही सुरक्षित नहीं है ……..अरे भाई कहाँ खो गए …..? उपाध्याय जी ने शर्मा जी के मौन को तोडा ………..कुछ नहीं बस आपकी बात पर विचार कर रहा था ……आपने मेरी आँखें खोल दीं ………”दिनेश”……(गुमटी मालिक को पुकारते हुए )………यार मोबाइल में 100 रूपए का रिचार्ज कर दो और दो पान लगा दो !

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