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केजरीवाल एक रहस्य ..............टोपी से टोपी तक !

Posted On: 19 Jan, 2014 Others में

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दिन मंगलवार दिनांक 14 /01 /14 …………..मीडिया द्वारा केजरीवाल की खाल उधेड़ना शुरू ………….जबकि यही मिडिया सोमवार तक केजरीवाल के महिमामंडन में इस प्रकार लगी थी जैसे कोंग्रेस के प्रमोद तिवारी जी कोंग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया मेडम की आरती उतारने में ………….
………………..खैर मुझे किसी प्रकार का प्रलोभन नहीं है और साफ़ साफ़ लिखूंगा ! मेरे पास आजकल नौकरी के *8* घंटे छोड़ कर कोई काम नहीं है उसमें भी साप्ताहिक अवकाश को भी पूरे दिन तपस्या की तरह टीवी समाचारों के सारे चैनलों में चल रहे मीडिया के प्रचार व दुस्प्रचार दोनों की विवेचना अकेले ही करता रहता हूँ लेकिन जब भी ज्यादा हो जाता है और हजम नहीं होता तो जागरण जंक्शन पर लिख देता हूँ चूँकि मैं भी सीमाओं में रहने वाला आम आदमी हूँ केजरीवाल वाला आम आदमी नहीं !
……………….आज दिनांक १८.०१.२०१४ को मेरे हाजमे का खराब होना……….. कई वजहें थी १. सोमनाथ भारती का स्टंट २.सिसोदिया जी का जांच कमेटी बैठाना ३.बिन्नी जी का आम आदमी बचाओ पार्ट-2 और सबसे अहम् और दस्तकारी वजह श्री केजरीवाल का ibn 7 पर राजदीप सरदेसाई के साथ इंटरव्यू ! …………अच्छा एक बात और भी है केजरीवाल के साथ …………..उन्होंने भारत का संविधान पढ़ा हो या नहीं लेकिन अपना बना जरुर रखा है जो कभी-कभी बातों-बातों में ही सार्वजनिक होता है मेरे या सार्वजनिक हुए कुछ केजरीवाल धाराएं निम्नलिखित हैं :-

१. धारा ४२० (सब चोर हैं)………..ये धारा केजरीवाल के कुछ अनुयायियों और सहभागियों को छोड़ कर सभी पर साबित की जा सकती है ! इसमें ये भी समाहित है कि अनुयायी और सहयोगियों भी तभी तक बचे हैं जब तक केजरीवाल की हां में हां है !
२.धारा ४२१ (आम आदमी की पहचान) ………..केजरीवाल की परिभाषा में आम आदमी का मतलब ये कतई नहीं है कि वो बोलता हो ,विरोध करता हो उसकी दो ही पहचान हैं ………एक कि वो जो उनके पूछने पर हाथ उठा कर बताये और दूसरा वो जो एस एम् एस करके हां कहे !
३.धारा ४२२ (धरना और प्रदर्शन) ……….. ये आम आदमी पार्टी का पेटेंट है ये कोई और करे उसे किसी प्रकार की मान्यता नहीं है उसे विरोधी पार्टियों की साजिश माना जायेगा !
४. धारा 420A (सरकारी चोर) ………….इस धारा के तहत सरकारी तंत्र के वो करमचारी आते हैं जो केजरीवाल सरकार के मंत्रियों की बात नहीं मानते वो चाहें जो कहें ………..अर्थात केजरीवाल संविधान कहता है कि वो अपना दिमाग और पोस्ट घर पर रख कार आयें और कान व् औजार (लाठी,पिस्तौल,मोबाइल,मीडिया कैमरा) लगा कर काम करें अन्यथा धारा 420A के तहत बर्खास्त या तबादला बिना जांच के करना जरूरी है जिसमें कोई सिफारिस या क़ानून की आवश्यकता नहीं है !
५. धारा 420B (जासूसी प्रथा)…………….इस धारा के तहत कोई भी दिल्ली के नागरिक को स्मार्ट मोबाईल कैमरे को साथ रखना जरुरी है और ये जिम्मेवारी उसी नागरिक की सुनिश्चित की जाती है कि भ्रष्ट कर्मचारियों को रिश्वत देते हुए फोटो या आवाज रिकॉर्ड करे और अपने काम कि चिंता ना करते हुए अदालतों के चक्कर लगाए !
६. धारा 421A (आम आदमी का रिनुअल)…………इस धारा के तहत आता हुआ आम आदमी है और जाता हुआ भ्रष्ट और लालची ……….अर्थात हर व्यक्ति पार्टी ज्वाइन करते ही आम आदमी बन जाता है और छोड़ते ही ख़ास या भ्रष्ट !
७. धारा 421B (चुनाव के पहले आम आदमी और बाद में ख़ास आदमी )…………..इस धारा के तहत जिन लोगों के बिजली पानी के कनेक्शन चुनाव प्रचार में काटे या जोड़े गए हों या बिल न भरने को कहा गया हो वो चुनाव होते ही ख़ास आदमी की श्रेणी में आ जाता है ! अपने बिल भुगतान के वो स्वेम ही जिम्मेवार होंगे इतना ही बहुत है कि वो कम से कम चुनाव प्रचार में आम आदमी कहलाने की प्रसिद्धी पा गए ……….अन्य सहायताओं की जरुरत नहीं है !
८. धारा 420C (बिना कैमरे के सामने कोई भी कार्यवाही अवैध है) …………..अर्थात बिना कैमरा कोई भी कार्यवाही की जाती है तो संवैधानिक नहीं कहा जाएगा मंत्री हों या आम आदमी जासूस कैमरा जरुरी है छोटे लोग अपना मोबाइल यूज़ करें और मंत्री टीवी मीडिया का कैमरा !
९. धारा 422A (आफिस में ना बैठो और धरना प्रदर्शन,प्रेस कॉन्फ्रेन्स या रोड ड्रामा करते रहो)……………अर्थ आप ही लगा लीजिये मैं अब ज्यादा नहीं लिखना चाहता !

…………………थोड़ी बात इंटरव्यू की हो जाए ………..कोई व्यक्ति कितना रट्टा मार सकता है ? ……………कमाल हो गया एक दो बातें सुन कर तो अब नफरत होने लगी है जैसे …मैं कुछ नहीं हूँ ,आम आदमी चाहता है ,जनता शासन करेगी ,जनता कहेगी तो में करूंगा ,२४ घंटे में हो जाएगा ,सारे पार्टी वाले डरे हुए हैं …………………..मैं ज्यादा नहीं कहता पर आज इन शब्दों को सुनते ही किसी का भी दिमाग चकरा जाता जाता होगा ……….मेरा भी !
…………………में ये मानता हूँ भ्रष्टाचार हैं ,नेता काम नहीं करते, सिस्टम सड चुका है ,व्यवस्था बदलने की जरुरत है लेकिन कोई केजरीवाल पर विश्वाश क्यों करे ……………क्योंकि ये टोपी पहनते हैं जिस पर आम आदमी लिखा है इसलिए या दिल्ली में सरकार बना ली इसलिए या केजरीवाल स्वेंभु ईमानदार बने हैं इसलिए या ये रोड पर धरना देते है इसलिए या लोग इनकी पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं इसलिए या जनता को बेवकूफ समझते हैं इसलिए ?…………….जब तक इनके साथ अन्ना,किरण बेदी और बाबा रामदेव जैसे लोग थे जिन्होंने कुछ तो किया है ? मेरी समझ में आ रहा था लेकिन अब नहीं !
………………एक बात और आज केजरीवाल को सुन कर ऐसा कतई नहीं लगा कि वो किसी सिस्टम को सुधारने की कोशिश भी कर रहे हों …………. उनका एक वाक्य ”दो चार को सस्पेंड करो ट्रांसफर करो सब डर के मारे सुधर जायेंगे” …..ये कोई तरीका है और क्या डर से ही सारी समस्याओं का हल निकलेगा ?………..यूँ कहें या इनसे पूँछें कि ये सबको कैसे डराएंगे ………जनता के द्वारा ? और अगर जनता पलट कर डराने लगी तब कैसे संभालेंगे किससे डरवाएंगे ! जिस देश में ६५ % जनसंख्या ३५ साल के नीचे हो और २५० लोगों के बीच एक पुलिस वाला हो वहाँ क्या हाल होगा ? कल इनका ही टोपी वाला आम आदमी डराने लगा ये क्या करेंगे ? चूँकि ऐसा पहले हो चुका है इसीलिये मैं कह रहा हूँ ! अभी मजा आ रहा है फिर क्या होगा ?
……………..में किसी का पक्ष ले कर बात नहीं कर रहा हूँ और ना ही अपना पक्ष रखूंगा लेकिन में इतना जरूर बतादूँ कि में भी इस टोपी वाले की टोपी पहन चुका हूँ ! मीडिया से बिना भ्रमित हुए में समझ चुका हूँ कि या तो केजरीवाल पागल है या सबको पागल बना रहा है मुझे अगर कोई तीसरा ऑप्शन न दिया जाए तो में कोंग्रेश को फिर चुनूंगा !

………………

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jlsingh के द्वारा
January 20, 2014

आदरणीय चौहान जी, सादर अभिवादन! आपका स्पष्टवादिता प्रिय लगी…. केजरीवाल पागल है या जुनूनी यह तो समय बतायेगा ..केजरीवाल को बनाने वाले भी हम ही लोग हैं और बिगाड़ेंगे भी तो हम ही लोग…कांग्रेस को झेले हैं तो उसका दोष भी भी तो हम ही लोग हैं क्योंकि वह भी तो जनता द्वारा चुनकर ही आती है…. ज्यादा समय नहीं है चार महीने बचे हैं मीडिया जितना डिकाहयेगी हम लोग वही तो देखेंगे. दिल्ली में कितना परिवर्तन हुआ वह तो दिल्ली वाले जानेंगे … बाकी जगह की जनता अपना मत अवश्य देगी. जमशेदपुर में एक एस पी हुआ करते थे डॉ. अजय कुमार. बड़े ही शख्त … उनके समय में बदमाश या तो अपराध छोड़ चुके थे या दुनिया ही छोड़ना पड़ा था. आम जनता उनके कृयाकलाप से खुश थी. पर राजनीतिज्ञों को भला यह सब कैसे मंजूर होता … डॉ. अजय कुमार ने पुलिस सेवा से त्यागपत्र दे दिया और कुछ दिनों उद्योग घराने की सेवा की. पिछली बार के लोक सभा चुनाव में वे जे वी एम् की टिकट पर जमशेदपुर से चुनाव लड़ा और सबने उनके नाम पर मुहर लगाई …अप्रत्याशित वोटों से जीते और आज भी लोकप्रिय हैं … पर विरोधी तो उनमे छेद ही देखते हैं … झारखण्ड बने हुए तेरह साल हो गए भाजपा सहित मिली जुली सरकारें रहीं पर झाड़खंड का बिहार से भी बुरा हाल है क्या कहें… मोदी आए थे रांची में नकली संसद भवन से सपना दिखाया … बड़ी भीड़ जुटी थी. मोदी जी के प्रचार का खर्च कौन वहन कर रहा है? यह सवाल मीडिया भी नहीं पूछता…. जनता का क्या है कभी इसको कभी उसको जिताती है …हारती तो स्वयं है … सादर …


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